Ś
Shakambhari
Shakambhari Devi Shaktipeeth - Introduction
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श्री शाकम्भरी देवी शक्तिपीठ

प्राचीन शक्तिपीठ - सहारनपुर

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माँ शाकम्भरी देवी का आशीर्वाद

सभी भक्तों पर बना रहे।

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दिव्य दर्शन

आध्यात्मिक शांति का स्थान

मंदिर परिचय

श्री शाकम्भरी देवी शक्तिपीठ, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित एक प्राचीन सिद्ध स्थान है।। यह मंदिर माँ दुर्गा के अवतार, देवी शाकम्भरी को समर्पित है, जो पोषण, वनस्पति और करुणा की प्रतीक हैं।

स्थान और स्थापना

यह पवित्र शक्तिपीठ शिवालिक पहाड़ियों की गोद में, सहारनपुर से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर में, बेहट तहसील के जसमौर गांव में स्थित है। मंदिर का प्राचीन इतिहास मौर्य काल से जुड़ा हुआ है, जब यह क्षेत्र श्रुघ्न देश के नाम से जाना जाता था। माना जाता है कि महान आचार्य चाणक्य, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और आदि शंकराचार्य ने इस पवित्र स्थल का दर्शन किया था। मंदिर के सभी कार्य और मंदिर राणा परिवार जसमौर के अंतर्गत आता है, जबसे मंदिर की स्थापना हुई तब से जसमौर के राणा परिवार के अंतर्गत मंदिर की सारी देखरेख राणा परिवार ही करता है।

पौराणिक कथा

देवी भागवत पुराण और दुर्गा सप्तशती के अनुसार, प्राचीन काल में दुर्गमासुर नामक राक्षस ने वेदों को चुरा लिया और देवताओं को पराजित कर दिया। उसके अत्याचार के कारण पृथ्वी पर सौ वर्षों का भीषण अकाल पड़ा। देवताओं की प्रार्थना पर माँ आदिशक्ति ने शाकम्भरी देवी के रूप में अवतार लिया। देवी ने अपने सौ नेत्रों से करुणा के आंसू बहाए, जिससे अत्यधिक वर्षा हुई और सात शाक भाजी सब्जियां उत्पन्न हुईं, जिससे पूरे संसार का भरण-पोषण होता है।

मंदिर की विशेषताएं

मंदिर के गर्भगृह में माँ शाकम्भरी देवी के विशेष मुख्य दर्शन विराजमान हैं। दाहिनी ओर भीमा देवी और भ्रामरी देवी जी के दर्शन हैं, जबकि बाईं ओर शताक्षी देवी जी विराजमान हैं। इन चारों देवियों के मध्य में बाल गणेश जी विराजमान हैं। मंदिर से लगभग एक किलोमीटर पूर्व में भूरा देव मंदिर स्थित है, जहां यात्रा को पूर्ण करने के लिए सबसे पहले दर्शन करना आवश्यक माना जाता है।

धार्मिक महत्व

श्री शाकम्भरी देवी शक्तिपीठ एक प्रामाणिक और सिद्ध शक्तिपीठ है। यहां माता के दर्शन और पूजा-अर्चना से भक्तों को समृद्धि, सुरक्षा, अच्छी फसल, अच्छा स्वास्थ्य और पापों से मुक्ति मिलती है। यह सिद्धपीठ है जहां मुंडन संस्कार कराने लोग देश-विदेश के कोने-कोने से आते हैं, यहां पर बच्चे का पहला मुंडन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। यहां पर बने प्राचीन हवन कुंड में भी भक्त देश के कोने-कोने से आकर हवन करते हैं, भक्तों द्वारा जो भी मनत मांगी जाती है वह पूर्ण होने पर भक्तों द्वारा यहां पर भंडारा भोग भी कराया जाता है। माता रानी की जयंती पर भी विशाल मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। मंदिर में शुद्ध शाकाहार का पालन किया जाता है, जो देवी की शाकाहारी तपस्या का प्रतीक है। प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं, विशेषकर नवरात्रि, दिवाली और होली के दौरान यहां विशाल मेला लगता है।

कैसे पहुंचें

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डे देहरादून और दिल्ली इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा हैं, जहां से सड़क या रेल मार्ग से सहारनपुर पहुंचा जा सकता है。

रेल मार्ग: सहारनपुर रेलवे स्टेशन मुख्य रेलवे हब है, जो मंदिर से 40 किलोमीटर दूर है। यहां से टैक्सी और बस सेवाएं उपलब्ध हैं。

सड़क मार्ग: आप भारत के किसी भी शहर से बस या कार द्वारा सहारनपुर पहुंच सकते हैं और सहारनपुर में बेहट अड्डा स्टैंड पहुंचकर आसानी से बस द्वारा यहां पहुंच सकते हैं या अपनी कार द्वारा सीधे बेहट अड्डे होते हुए यहां पहुंच सकते हैं।

माँ शाकम्भरी का आशीर्वाद

॥ ॐ ह्रीं शाकम्भर्यै नमः ॥

श्री शाकम्भरी देवी शक्तिपीठ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्य शक्ति का केंद्र है। यहां आने वाले प्रत्येक भक्त को माँ की असीम कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंदिर की शांत और पवित्र वातावरण में आकर श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और आत्मिक संतुष्टि का अनुभव होता है।

॥ जय माता की ॥

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